बहनों की अदला बदली और ग्रुप सेक्स-

 

बहनों की अदला बदली और ग्रुप सेक्स- 1

सिस्टर Xxx कहानी मेरे दोस्त की बहन की चुदाई की है. मैंने उसे बहन पटाने के गुर बताये तो उसने अपनी जवान बहन की चूत कैसे फाड़ी?

दोस्तो, मेरा नाम निखिल है और मैं अपनी अगली सेक्स कहानी लेकर हाज़िर हूँ.आपने मेरी पिछली कहानियों को जो प्यार दिया, उसके लिए बहुत धन्यवाद.

आज मैं आपके सामने
अपनी और अपनी दीदी युविका की चुदाई की कहानी
का अगला भाग लेकर आया हूँ. मैं उम्मीद करता हूँ आपको ये सिस्टर Xxx कहानी पसंद आएगी.

मैं आपको पहले ये बता दूं कि इस सेक्स कहानी में मेरी कहानियों के एक प्रसंशक ने ही मेरी बहन को चोदा है और मैंने उसकी बहन को चोदा है.

उस प्रशंसक का नाम सुनील है और वो 21 साल का है. सुनील जालंधर का रहने वाला है.

एक दिन मुझे सुनील का मेल आया और उसने किसी प्रशंसक की तरह मुझे बताया कि आपकी कहानियां मुझे बहुत पसंद हैं. मैंने कई बार उन कहानियों को पढ़ते हुए मुठ मारी है.

ऐसे ही बातें करते-करते उसने मुझे बताया कि मैं भी अपनी छोटी बहन को चोदना चाहता हूँ.

सुनील ने अपनी बहन का नाम सुरीली बताया और इसके लिए सुनील ने मेरी मदद मांगी.

पहले तो मैंने सोचा कि वो ऐसे ही झूठ बोल रहा है, पर उसके बार बार बोलने पर मैंने सोचा कि इसकी मदद कर देता हूँ.

अब मैं सुनील को मैसेज करके बताया करता था कि तू ऐसा किया कर या वैसा किया कर, जिससे तेरी बहन तुझसे खुश रहे और उसके करीब आती जाए.

फिर एक दिन उसने मुझसे ऐसी बात कही कि मैं अब उसकी बहन को उससे पटवाने में पूरी जान लगाने लगा.

सुनील ने मुझसे कहा कि अगर मेरी बहन आपकी मदद से पट गयी, तो आप और आपकी बहन … और मैं और मेरी बहन सुरीली साथ में मिल कर कहीं सामूहिक चुदाई करेंगे.

पहले तो मैंने सोचा कि सुनील ऐसे ही बोल रहा होगा, वो क्यों अपनी सगी बहन को मुझसे चुदवाएगा और वैसे भी मेरी दीदी युविका इसके लिए राज़ी नहीं होने वाली थीं.

फिर पांच दिन बाद उसने मुझे सुरीली का फ़ोटो दिखाया और मेरी सारी सोच ही बदल गयी.
उसकी बहन नाम से ही नहीं, बदन से भी सुरीली थी.

वो अभी 19 साल की थी और उसका बदन एकदम गठीला था.
उसके फिगर ने मुझे मेरी दीदी युविका के 6-7 साल पहले के फिगर की याद दिला दी.
सुरीली भी मेरी दीदी की ही तरह हुस्न की मल्लिका थी. वो भी मेरी दीदी की ही तरह छोटी हाइट वाली थी और उसका वजन भी ज्यादा नहीं था.

सुरीली के कातिल शरीर ने मुझे उस टाइम की याद दिला दी, जब मैं मेरी बहन को शुरू में चोदता था.
मैं ऊंचे कद का था और मेरी दीदी छोटे कद की थीं. इसलिए मैं दीदी को खड़े खड़े अपनी गोद में उठा कर चोदता था.

शादी के बाद मेरी दीदी वजन से भारी हो गयी थीं, तो वो मुझसे उठाई नहीं जाती थीं.

तो मैंने सोच लिया था कि सुरीली को भी ऐसे ही चोदूंगा. अब चाहे कुछ भी हो जाए, मैं सुनील की मदद जरूर करूंगा.

मैंने सुनील का नंबर ले लिया और उसको समय समय पर फ़ोन करता रहता था. उसको निर्देश देता रहता था.
वो कभी-कभी मुझे वीडियो कॉल करके सुरीली को चुपके से दिखाता भी था.
सुनील की बहन को गोद में उठा कर चोदने का मेरा बहुत मन होने लगा था.

लगातार 8 महीने मेहनत करने के बाद सुरीली को सुनील ने पटा ही लिया और अपनी बहन की सील तोड़ दी.
अब वो रोज़ ही अपनी सिस्टर Xxx करने लगा था.

उसने मुझे सुरीली के नंगे फ़ोटो भी भेजे. एक फुल फोटो में तो नंगी सुरीली बिल्कुल जन्नत की हूर की तरह दिख रही थी.

मगर अब सुनील ने मेरे साथ बात करना कम कर दिया और वो मुझसे कन्नी काटने लगा. मुझे लगा वो अपना किया हुआ वादा भूल गया है.

फिर एक दिन मुझे पता चला कि मेरी दीदी युविका और जीजू जालंधर जीजू के किसी काम से गए हैं.
तो मैंने सोचा कि इससे अच्छा मौका कहां मिलेगा.
मैंने सोच लिया कि दीदी को इस सामूहिक चुदाई के लिए मैं कैसे भी मना लूंगा, पर पहले सुनील को ये बात याद दिलानी पड़ेगी.

सुनील को मैंने 2 महीने से कोई फ़ोन नहीं किया था. उसको अपनी बहन सुरीली को चोदते हुए 3 महीने हो गए थे.

उस दिन मैंने सुनील को फ़ोन लगाया और उसे सामूहिक चुदाई वाले प्लान के बारे में याद दिलाया.

सुनील ने कहा- मैं कुछ भी भूला नहीं हूँ. मैं हर रोज़ सुरीली की चुदाई के वक्त उससे आपकी बात करता हूँ और मैंने सुरीली को आपके बारे में सब बता दिया है. सुरीली भी आपसे चुदने के लिए रेडी है.

मैं सुनील की बात सुनकर खुश हुआ.

उसने आगे बताया कि सुरीली पहले तो बहुत हैरान हो गयी थी कि जब उसने आपकी और आपकी दीदी की जबरदस्त चुदाई की कहानी पढ़ाई थी. इस पर सुरीली बोली थी कि कोई बहन अपने भाई से इतना ज्यादा कैसे चुद सकती है. मगर अब जब वो मुझसे चुद चुकी है, तो उसे समझ आ गया है कि चुदाई की मस्ती क्या चीज होती है.

सुनील ने आगे बताया कि सुरीली को वो सामूहिक चुदाई के प्लान के बारे में बता चुका है और वो राज़ी भी हो गयी है.

मैंने पूछा कि सुरीली ने ये सब जानकार क्या रिएक्ट किया.
तो सुनील ने बताया- मेरी बहन भी किसी दूसरे मर्द का लौड़ा अपनी चूत में डालने का अनुभव लेना चाहती है.

मैं ये सुनकर बहुत खुश हो गया.
मैंने उसे बताया- मैं कल ही जालंधर आ रहा हूँ. तुम दोनों तैयार रहना.

वो बोला- ठीक है, पर समय बता देते तो ठीक रहता.
मैंने उससे कहा- मैं तुम्हें कभी भी बुला सकता हूँ, तुम दोनों तैयार रहना.

अगले दिन मैं जालंधर निकल गया.

दीदी और जीजू किसी होटल में रुके थे जो सुनील के घर से ज्यादा दूर नहीं था.

मैं सीधा दीदी और जीजू से मिलने उनके होटल चला गया. वो दोनों मुझे इतने समय के बाद देख कर हैरान हो गए.

दरअसल मैं उनसे 9 महीनों से मिला नहीं था … और न ही ज्यादा बात हो पाई थी.

मैंने दीदी जीजा जी दोनों से झूठ बोल दिया कि मैं यहां अपने किसी दोस्त की शादी में आया था, तो मुझे पता चला कि आप दोनों भी यहां आए हो. इसी लिए मैं आपसे मिलने आ गया.

दीदी मुझे शक की निगाह से देख रही थी. उसे पता चल गया था कि मैं कुछ और ही करने आया हूँ.

दीदी बहुत सुंदर लग रही थी. हमने थोड़ी देर बातें की. तभी जीजू को एक फ़ोन आया, तो जीजू में हम दोनों से कहा कि वो किसी मीटिंग में जा रहे हैं, शायद ये मीटिंग इसी होटल में होगी. इसमें मुझे एक घंटा लग सकता है.

मैं सहमति में सर हिलाने लगा.

जैसे ही जीजू कमरे से बाहर निकले, मैं दीदी के ऊपर टूट पड़ा और दीदी को गले गला कर उनको किस करने लगा.
पर दीदी ने मुझे हटा दिया.
मैंने सोचा दीदी चुदने के लिए राज़ी नहीं है.

पर वो उठीं और दरवाजे के पास जाकर कुंडी लगा कर पीछे मुड़ कर मुस्कुराने लगीं.
फिर दीदी वहीं खड़े होकर अपने कपड़े उतारने लगीं.

मैंने भी बगल की टेबल पर रखा बियर का कैन उठाया और बियर पीते हुए अपनी नंगी होती दीदी की अदाओं को निहारने लगा.

थोड़ी देर में ही दीदी पूरी नंगी हो गईं.
अब मेरे सामने दीदी का नंगा बदन हिलोरें मार रहा था.

उन्हें नंगी देख कर मेरा लौड़ा भी उछाल मारने लगा.
मैं उठा और दीदी के पास जाकर उनको किस करने लगा और उनके बड़े बड़े चुच्चों को अपने हाथ में लेने की नाकाम कोशिश करने लगा.

दीदी की चूत हमेशा की तरह एकदम साफ थी. उस पर एक भी बाल नहीं था.

मैंने दीदी से कहा- दीदी … मैंने तो सोचा था कि आप चुदाई के लिए मानोगी ही नहीं, पर आप तो मुझ पर टूट ही पड़ीं.
दीदी ने बताया- हां भाई, तेरे जीजू ने कई महीनों से तेरी दीदी को चोदा ही नहीं है. इसलिए आज मैं खुद अपनी आग बुझाना चाहती थी.

दीदी की काम वासना देख कर मुझे एक बहुत अच्छा विचार आया.
मैंने दीदी को अपनी बांहों में लेकर पूरी तरह गर्म कर दिया.

दीदी का बदन आग की तरह तप रहा था.

मैंने अपना लौड़ा निकाला और दीदी की चूत पर रख कर बाहर से रगड़ने लगा.
दीदी की हवस चरम पर थी. उस हवस के कारण दीदी जानवरों की तरह हरकतें करने लगीं.

मेरा लौड़ा दीदी ने इतनी जोर से पकड़ा कि जैसे दीदी के हाथों में किसी पहलवान का जोर आ गया हो.

उसी समय मैंने अपना लौड़ा पीछे कर लिया और अपनी पैंट पहन ली.

मेरी दीदी ये देख कर हैरान रह गईं और सोचने लगीं कि ये क्या कर रहा है.
दीदी ने मुझसे पूछा कि ये मैं क्या कर रहा हूँ?

तो मैंने अपने प्लान के बारे में दीदी को सब बता दिया.
दीदी ये सुनकर हैरान रह गईं. पहले तो दीदी सामूहिक चुदाई के लिए मना करने लगीं.

पर जब मैंने दीदी को बताया कि इतने सालों बाद आपको नया और जवान लौड़ा लेने के लिए मिलेगा, तो उनका मन बनने लगा.

फिर मैंने दीदी को बहुत समझाया और मना लिया. कुछ देर बाद दीदी की चुत की आग ने उनसे हां बुलवा ही ली.
मैंने दीदी से कहा कि जीजू के यहां रहते ये संभव नहीं हो पाएगा.
दीदी ने कहा कि परसों जीजू काम से बाहर चले जाएंगे. वो सुबह 6 बजे निकल जाएंगे और रात को ही वापिस आएंगे.

ये सुनकर मैं बहुत खुश हो गया.

इसके बाद मैंने दीदी की चुदाई की और उनके साथ सामूहिक चुदाई की चर्चा करने लगा.

उनको चार के ग्रुप में होने वाली चुदाई की कुछ ब्लू फिल्म भी दिखा दीं. इससे मेरी दीदी की चुत नए लंड के लिए कुलबुलाने लगी.
इधर मेरा लंड तो पहले से ही सुरीली की चुत के लिए अंगड़ाई भर रहा था.

चुदाई के बाद मैंने जल्दी से जाकर दीदी के साथ वाला कमरा बुक कर लिया और सुनील और सुरीली को भी परसों वहीं बुला लिया.
जीजू को मैंने पता नहीं चलने दिया कि मैं उनके साथ वाले कमरे में हूँ.

परसों सुबह 6 बजे जीजू चले गए और दीदी को मैंने अपने रूम में बुला लिया.
दीदी भी सुबह ही नहा कर आ गयी थीं. दीदी ने एक झीनी सी नाइटी पहनी थी और अन्दर कुछ नहीं पहना था.
आज दीदी चुदने के पूरे मूड में थीं.

सुबह से ही हम दोनों ने दो दो पैग गटक लिए थे.

करीब 8 बजे सुनील और सुरीली अपने घर में कुछ बहाना बना कर होटल पहुंच गए थे.
मैंने उन्हें अपने रूम में आने के लिए बुला लिया.

उन लोगों ने दरवाजा खटखटाया.
मैंने जैसे ही दरवाजा खोला, तो मैंने देखा कि सुनील और सुरीली बाहर खड़े हैं.

सुरीली उन फ़ोटो से भी कहीं अधिक खूबसूरत लग रही थी. उसने काले रंग का सूट पहन रखा था और लाल लिपस्टिक लगा रखी थी.
उसका सूट इतना टाइट था कि उसके चुच्चे मानो कैद कर दिए गए थे.

मैं तो थोड़ी देर उसको देखता ही रह गया. पर सुनील के मेरे साथ हैलो करने के लिए हाथ बढ़ाया, तो मेरा ध्यान टूटा.

मैंने उन दोनों को अन्दर बुलाया और बिठाया.

हम सभी ने थोड़ी देर बातें की, पर इस सारे समय में मेरा ध्यान सुरीली पर ही था.

मुझसे रहा नहीं जा रहा था. सब लोग हिचकिचा रहे थे.

तो मैंने माहौल बनाने के लिए टीवी में एक ब्लू फिल्म लगा दी जिसमें दो लड़के और दो लड़कियां चुदाई कर रहे थे.

मैंने सबको बिस्तर के पास आ जाने को कह दिया.

बिस्तर के बीच में मैंने दोनों लड़कियों को बिठा दिया और सुरीली की तरफ मैं बैठ गया और मेरी दीदी युविका की तरफ सुनील बैठ गया.
मैंने दूसरी फिल्म चालू कर दी.

थोड़ी देर में सब उत्तेजित होने लग गए. मैंने अपना हाथ सुरीली के हाथ पर रख दिया. उसका हाथ एकदम मुलायम था, जैसा मैंने सोचा था.

मैं अपने हाथ से उसके हाथ को रगड़ने लगा और दूसरी तरफ सुनील दीदी नाइटी के ऊपर से उनके चुच्चों को सहला रहा था.

टीवी में वो दोनों लड़के उन लड़कियों की भयानक चुदाई कर रहे थे. हम सब बहुत गर्म हो गए थे.

मैं सुरीली की सलवार के ऊपर से ही उसकी चूत सहला रहा था और ऊपर से उसके स्तनों को दबाने लगा.

दूसरी तरफ सुनील ने मेरी दीदी की नाइटी ऊपर कर ली थी और दीदी की चूत में उंगली डाल रहा था.
वो दोनों बिल्कुल मदहोश हो गए थे.

तभी हम दोनों ने अपने अपने कपड़े उतार दिए. सुनील का लौड़ा भी एकदम तन गया था. उसका लौड़ा एक दम काला था जो कि देखने में बहुत भयानक लग रहा था.

उसके बाद हम एक दूसरे की बहनों के ऊपर लेट गए और उनको ज़ोर ज़ोर से चुम्बन करने लगे. मैंने सुरीली की सारी लाल लिपस्टिक चाट कर मिटा दी.

इसके बाद हमने अपने लौड़े एक दूसरे की बहनों के मुँह में डाल दिए.

सुरीली ने मुझे रोक दिया और कहा- पहले मुझको प्रग्नेंट न होने वाली दवाई खानी है.
मैंने उसको जल्दी करने के लिए कहा.

वो उठी और अपने पर्स में दवाई ढूंढने लगी.
पर मैं बहुत गर्म हो गया था, तो मैंने उसको पीछे से जाकर पकड़ लिया.

वो हंसने लगी और बोली- जरा सब्र तो कर यार!
मैंने उससे कहा- तू अपना काम करती रह जान … मैं अपना काम करता हूँ.

वो दवाई ढूंढ रही थी और मैं उसको पीछे से पकड़ कर उसकी चुच्चियों को दबा रहा था. उसकी चूत को सलवार के बाहर से ज़ोर ज़ोर से रगड़ रहा था.

सुरीली ने दवाई ढूंढ कर खा ली और वो सीधी हो गयी.
उसकी कमीज़ इतनी टाइट थी कि मेरा हाथ अन्दर जा ही नहीं रहा था.
मुझे गुस्सा आ गया और मैंने ज़ोर लगा कर उसकी कमीज़ फाड़ दी और साथ ही उसकी सलवार भी.

उसके बाद मैंने उसकी लाल रंग की ब्रा निकाल दी और उसकी पैंटी भी उतार दी.

अब मेरे सामने उसके मुलायम चुच्चे और मक्खन जैसी चूत थी. सुनील ने उसको चोद चोद कर उसके चुच्चे बहुत बड़े कर दिए थे.
सुरीली के चुच्चे लगभग मेरी बहन के चुच्चों जितने बड़े होने वाले थे. उसके टाइट सूट में वो इतने बड़े नहीं लग रहे थे.

मैंने सुनील से पूछा- यार, तुमने इतने कम समय में ये कैसे कर दिया?
उसने कहा कि मुझे बड़े बड़े चुच्चे बहुत पसंद हैं. मुझको जब भी समय मिलता था, तभी मैं सुरीली के चुच्चों को दबाने और चूसने के काम में लग जाता था.

सुरीली ने भी बोला- हां, मुझे भी बड़े चुच्चे पसंद हैं. मैं आयेशा टाकिया जैसे बड़े बूब्स करवाना चाहती हूँ.

उसके मुँह से ये सुनकर मैं उत्तेजित हो गया और मैंने उसके चुच्चों को ज़ोर-ज़ोर से दबाना शुरू कर दिया.
सुरीली के मम्मों पर ज़ोर-ज़ोर से चांटे मारना शुरू कर दिए.

मैंने उसकी चूत में एक ही बार में अपनी 2 उंगलियां डाल दीं और ज़ोर ज़ोर से अन्दर बाहर करते हुए हिलाने लगा.
इससे उसे खड़े रहने में मुश्किल होने लगी और वो नीचे लेटने लगी. पर मैंने उसको लेटने नहीं दिया.

सुरीली को इतना मज़ा आ रहा था कि वो अपनी आवाज़ काबू नहीं कर पा रही थी. वो ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगी.

मैंने झट उसके मुँह में अपना कच्छा डाल दिया, जिससे उसकी आवाज़ कम हो गयी

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